“सांस्कृतिक फूहड़पन और भड़ैंती के विरूद्ध”

“सांस्कृतिक फूहड़पन और भड़ैंती के विरूद्ध”

लोककला का उत्सव और उत्सव का गांव के रूप में चर्चित जोगिया जनूबी पट्टी,आजकल चर्चा में है । यह गांव गौतम बुद्ध की निर्वाण स्थली कुशीनगर से लगभग 17 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित एक छोटा सा कस्बा,फाजिलनगर से तीन किलोमीटर दूर है । राष्ट्रीयकृत मार्ग से एक ऊबड़-खाबड़, पगडण्डीनुमा सड़क जोगिया जनूबा पट्टी को जाती है । जोगिया जनूबी पट्टी हिन्दी कथाकार सुभाष चन्द्र कुशवाहा का पैतृक गांव है। उनके संयोजन में `लोकरंग सांस्कृतिक समिति ने एक नई सांस्कृतिक पहल ली गयी है ।

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‘लोकरंग 2010′, 8- 9 मई के लिए महाश्वेता जी का संदेश ( A message from Mahasveta Devi to ‘Lokrang 2010′ )



लोकरंग सांस्कृतिक समिति की अन्य मंचों पर प्रस्तुतियां

- उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा काशी में आयोजित व्यास महोत्सव(28 से 2 दिसम्बर 2009) में, लोकरंग सांस्कृतिक समिति ने 29 नवम्बर, 2009 सांय 7 बजे अस्सी घाट पर ढाई घंटे का `लोकरंग´ कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसमें जांघिया नृत्य, फरी नृत्य और हिरावल, पटना की गायन टीमों ने देशी, विदेशी पर्यटकों को लोक गायकी एवं लोक नृत्त्य से सम्मोहित किया ।
-लोकरंग सांस्कृतिक समिति ने, ज.स.म.पटना के आमंत्रण पर ‘सृजनोत्तसव 2010′ में 14 मार्च 2010 को फरी नृत्य प्रस्तुत किया ।
नोट- लोकरंग सांस्कृतिक समिति जनपक्षधर संस्थाओं के आमंत्रण पर अन्यत्र भी कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकती है बशर्ते कि उसके वैचारिक पक्ष को प्रभावित करने की कोशिश न की जाए ।